Thursday, 7 May 2009

आज

आज

आज बालगोपाल रिझाना है
कुछ भी समय नहीं गवाना है

भोर भये जग सज संवर जाना है
मटकी कमरिया यमुना जल लाना है

रसोई चौक पुराई कर दही मंथना है
माखन मिसरी प्यारे को अर्पण करना है

आँचल भर ताजे फूल छाँट हार पिरोना है
चन्दन घिस केसर तिलक संवारेको लगाना है

रोम रोम रत गोविन्दा भज सवयं को समर्पना है
आज रूठे को मानना और रिझाना स्वयं गवाना है

रीती रिवाज पूजा विधि मन्त्र तंत्र यंत्र जानू नहीं
अपनी प्रीति सदियों पुरानी उसी को मानु मैं सही

माँ बेटे का रिश्ता होता सबसे ज्यादा मन लुभावना
माखन चोर रिझाने की मन मेरा करे है सम्भावना

आज कान्हा को रिझाना है
कुछ भी समय नहीं गवाना है


रोम रोम रत गोविन्दा भज सवयं समर्पना है
आज रूठे को मानना रिझाना स्वयं गवाना है

आज मनमोहना को रिझाना है
कुछ भी समय नहीं गवाना है

अहेम झूठी मान मर्यादा शानो शौकत तजना है
कृष्ण चरण धुल मस्तक रज अपने को तजना है

आज कन्हैया को रिझाना है
कुछ भी समय नहीं गवाना है

भोर भये जग सज संवर जाना है
मटकी कमरिया यमुना जल लाना है

भोर भये जग सज संवर जाना है
मटकी कमरिया यमुना जल लाना है

मैं योशोदा वो कान्हा हमारा रिश्ता मन लुभावना
माखन चोर रिझाने की मन मेरा आज करे कामना

आज बालगोपाल रिझाना है
कुछ भी समय नहीं गवाना है

--बीना गुप्ता

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