आज
आज बालगोपाल रिझाना है
कुछ भी समय नहीं गवाना है
भोर भये जग सज संवर जाना है
मटकी कमरिया यमुना जल लाना है
रसोई चौक पुराई कर दही मंथना है
माखन मिसरी प्यारे को अर्पण करना है
आँचल भर ताजे फूल छाँट हार पिरोना है
चन्दन घिस केसर तिलक संवारेको लगाना है
रोम रोम रत गोविन्दा भज सवयं को समर्पना है
आज रूठे को मानना और रिझाना स्वयं गवाना है
रीती रिवाज पूजा विधि मन्त्र तंत्र यंत्र जानू नहीं
अपनी प्रीति सदियों पुरानी उसी को मानु मैं सही
माँ बेटे का रिश्ता होता सबसे ज्यादा मन लुभावना
माखन चोर रिझाने की मन मेरा करे है सम्भावना
आज कान्हा को रिझाना है
कुछ भी समय नहीं गवाना है
रोम रोम रत गोविन्दा भज सवयं समर्पना है
आज रूठे को मानना रिझाना स्वयं गवाना है
आज मनमोहना को रिझाना है
कुछ भी समय नहीं गवाना है
अहेम झूठी मान मर्यादा शानो शौकत तजना है
कृष्ण चरण धुल मस्तक रज अपने को तजना है
आज कन्हैया को रिझाना है
कुछ भी समय नहीं गवाना है
भोर भये जग सज संवर जाना है
मटकी कमरिया यमुना जल लाना है
भोर भये जग सज संवर जाना है
मटकी कमरिया यमुना जल लाना है
मैं योशोदा वो कान्हा हमारा रिश्ता मन लुभावना
माखन चोर रिझाने की मन मेरा आज करे कामना
आज बालगोपाल रिझाना है
कुछ भी समय नहीं गवाना है
--बीना गुप्ता
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