Saturday, 2 May 2009

umang

उमंग

अंग अंग पुलकित
रोम रोम हर्षित
रक्तचाप का उठता
उफान करे मूर्छित

दुनिया है रंगीन
मन नहीं गमगीन
दिल में है तस्कीन
जीवन है आफरीन

सभी ओड़े हैं आवरण
इन्द्रधनुषी सतरंगे
स्याह साए सुबह शाम
अब मुख छिपाए हत्भगे

दीपावली सी जगमग
उमंग लहराए रगरग
नयी कलि आंगन खिली
ख़ुशी से है झोली भरी


कन्ह्ना ने अनकहा
अरमान सुन लिया
दिल को डेर सारी
खुशियों से भर दिया


चाल मैं है उमंग
जीवन मैं है तरंग
कोई गिले नहीं संग
मन उड़े अम्बर पतंग


--बीना गुप्ता

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