उमंग
अंग अंग पुलकित
रोम रोम हर्षित
रक्तचाप का उठता
उफान करे मूर्छित
दुनिया है रंगीन
मन नहीं गमगीन
दिल में है तस्कीन
जीवन है आफरीन
सभी ओड़े हैं आवरण
इन्द्रधनुषी सतरंगे
स्याह साए सुबह शाम
अब मुख छिपाए हत्भगे
दीपावली सी जगमग
उमंग लहराए रगरग
नयी कलि आंगन खिली
ख़ुशी से है झोली भरी
कन्ह्ना ने अनकहा
अरमान सुन लिया
दिल को डेर सारी
खुशियों से भर दिया
चाल मैं है उमंग
जीवन मैं है तरंग
कोई गिले नहीं संग
मन उड़े अम्बर पतंग
--बीना गुप्ता
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