मैं और मेरी तन्हाई
आज मिल बैठे दोनों
कुछ कही कुछ सूनी
चन्द भूली बिसरी यादें
उमड़ पड़ी जहन मैं
भावुकता ने प्रलय मचाई
और सय्लाब दिल को ले डूबा
कुछ अनकही बातें उभरी
कुछ गिले शिकवे कहे
प्यार को ठुकराने का सबब पुछा
बरसों का दबा गुबार फूट पडा
फ़र्ज़ और दिल की ज़ंग मैं
दिल ही हारा करते हें हमेशा
जिंदा लाश बनकर डोली में
कारवां रवां हुआ था कभी
फूलों की बरखा हुई थी
और मन ने रोकर कहा था
मेरी मजार पे फूल क्यों चढाते हो
दबे हुए को और क्यों दबाते हों
शोरगुल में दिल की हुक ठंडी पड़ी
मुर्दा चाहत, बेरुखी हँसी
बदहवास जिदगी का भोझ लादे
कारवां गुजर गया और हम
इस गुबार में गुम हों गये
डोली में महज शरीर था
आत्मा पीछे लुप्त हो गए थी
प्यार में विलीन सदा
के लिए येकामेक
बीना गुप्ता
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment