कुछ गुलाबी सुखी पंखुडियां
कुछ बोल, भूले बिसरे गीतों के
कुछ खिलखिलाती हँसी
कुछ देखे से, जाने पहचाने पल
एक अतितका चेहरा रोशन हुआ
बिसरी यादों के जालों के झूमर चीर
पुराणी यादों का कारवां रवां हुआ
झरोखों में कांपते दिए जगमगा उठे
बचपन दस्तक किए ऊँगली पकड़े
ले चला जानी पहचानी राहों में
मन खुशी से झूम उठा
निराशा का आवरण उतार
आशा धरे
नयी उमंग
में रोम रोम रम
चल पडा
उत्साहित
प्रसन्न
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