सुर संगम संगीत
उकसायें हैं मन को
चल कुछ तार छेड़
कुछ सुनहरे सपने भुन
रागिनी सात सुरों की
थिर्काए अल्ताये पैरों को
घुन्घुनाये प्रेमवश घुँघरू
थिरक थिरक ठुमके मन
प्रेमपाश में सोये दिल कों
जगाये झंकझोर कर
सिरहन की लहर उभरी
अंगडाई लिए यकायक
तन मन विभोर हुआ
सुर सिंगार से सुसज्जित
भावों के पुष्प और अश्रु हार
भेंट करने मन मन्दिर मैं
बसे जुला जुलते बाल गोपलको
तन मन धन अर्पण
मगन बेहोश
अंतःकरण में विलीन
अगोचर
प्रेमवश
विव्हल
तरतर
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