Sunday, 10 August 2008

ओ क्रष्ण

ओ कृष्ण ओ कृष्ण
जल्दी आओ ना
मुझे ऐसे सताओ न
कबसे खड़ी आस लगा
अब तो झलक दिखा
न तड़पा तरसा
श्याम हो चली है श्याम्मा
अब तो दरस दिखा
तेरी सूरत नजर आयी न
मन मेरा बोखलाए रोये है
ऐसे मुझे सताओ न
अओना जल्दी आजाओ न
मेरा दिल टूट रहा है
साँस छुट रहा है
धड़कन रूठ रही है
आस तोडो न
रिश्ता बनाये रखो न
रोम रोम कांप रहा है
जिव्हा एक ही नाम दोहराये है
आओ न माँ को सताओ न
जल्दी चले आओ न
माखन मिसरी लिए खड़ी
हालत बिगड़ी बिखरी
होश नही भूली बिसर
राह तेरी तक रही अटल
अब और न तू मचल
तेरे सिवा जोर किसपे है
आओ न माँ को सताओ न
चलो जल्दी लौट आओ न

पग घुंघरू बोल उठे
मधुर स्वर गूंज उठे
मनमोर नाच उठा
पपीहा गीत गाने लगा
मेरा कान्हा आ गया
जोर से लिपट गया
भाव विभोर अश्रु बहे
उसने माके अश्रु पोंछे
माँ ने
उसके आंसू
कान्हा के चरण धुलने लगे
वातवरण हरा भरा होगाया
पता पत्ता खिल उठा
मण आबाद हुआ
मेरा कान्हा आ गया
और आभास हुआ
हम दो थे ही नही
वो वो ण रहा
में उसमे विलीन
वोह मुझमे
सब एक रंग
हो गए
क्रिश्न्न्मयेह
श्री क्रष्ण शरणं मम्




3 comments:

Sanjeet Tripathi said...

बढ़िया।
शुभकामनाओं के साथ स्वागत है।

admin said...

बहुत सुन्दर वर्णन। बहुत बहुत बधाई।

Amit K Sagar said...

बहुत सुंदर.